पंचम: पाठः रक्षाबंधनम्
पाठ का हिन्दी अनुवाद
[कक्षायां छात्राः वार्तालापं कुर्वन्ति।]
(कक्षा में छात्र वार्तालाप कर रहे हैं।)
घनश्यामः ― वर्षे। अद्य त्वं अति-आह्लादिता असि। किं कारणम्?
(हिन्दी अनुवाद― हे वर्षा ! आज तुम बहुत प्रसन्नचित्त हो! कारण क्या है?)
वर्षा ― आम् ! घनश्याम ! ह्यः मम द्वावपि अग्रजौ इन्दौरनगरात् गृहं प्रत्यागच्छताम्। नूनं परश्वः रक्षाबन्धनस्य पावनपर्व भविष्यति।
(हिन्दी अनुवाद― हाँ ! घनश्याम! कल मेरे दोनों ही बड़े भाई इन्दौर नगर से घर लौटकर आ गये। निश्चय ही परसों रक्षाबन्धन का त्यौहार होगा।)
मेघावती ― सत्वरं तूष्णीं भवन्तु। आचार्यः आगच्छति।
(हिन्दी अनुवाद― जल्दी ही चुप हो जाओ। आचार्य आ रहे हैं।)
[आचार्यः प्रविशति। छात्राः उत्तिष्ठन्ति अभिवादनं च कुर्वन्ति।]
(हिन्दी अनुवाद― आचार्य प्रवेश करते हैं। सभी छात्र खड़े हो जाते हैं और अभिवादन करते हैं।)
आचार्य: ― उपविशत! अस्माकं देशे के के प्रमुखाः उत्सवाः भवन्ति? मेघावति! त्वं वद।
(हिन्दी अनुवाद― बैठिये। हमारे देश में कौन-कौन से प्रमुख त्यौहार होते हैं। मेघावती ! तुम बतलाओ।)
मेघावती ― विजयादशमी, दीपावलिः, नवरोज्, ईद, होलिकोत्सवः, बैसाखी, ओणम्, मकर सङ्क्रान्तिः च।
(हिन्दी अनुवाद― दशहरा (विजयादशमी), दीपावली, नवरोज्, ईद, होली का त्यौहार, बैसाखी, ओणम और मकर संक्रान्ति।)
आचार्यः ― उचितम् । सम्प्रति श्रावणमासः। श्रावणमासस्य पौर्णिमायां रक्षाबन्धनपर्व भविष्यति। अद्य वयं 'रक्षाबन्धनम्' इति निबंधम् पठिष्यामः।
(हिन्दी अनुवाद― ठीक है। अब सावन का महीना है। सावन महीने की पूर्णमासी को रक्षाबन्धन का त्यौहार होगा। आज हम सब 'रक्षाबन्धन' शीर्षक निबन्ध को पढ़ेंगे।)
जनाः उत्सवप्रियाः भवन्ति। सामाजिकतायाः विकासे उत्सवाः सहायकाः। सुखस्य वृद्धयर्थम् अपि ते सहायका:। समाजस्वभावं संस्कृतिंय प्रकटीकुर्वन्ति।भारते अनेके उत्सवाः भवन्ति। तेषु रक्षाबन्धनम् एकः प्रमुखः उत्सवाः समाजस्वभावं संस्कृतिञ्च प्रकटीकुर्वन्ति। भा उत्सवः। अयं कालः जनानां मनासि आह्लादयति। पुनः वर्षन्त्यः जलधाराः जीवसृष्टि पुलकितां कुर्वन्ति। मयूराः स्वबर्ह प्रसार्य नृत्यन्ति। बालिकाः नवयुवतयः च दोलनक्रीडया प्रसन्नाः भवन्ति। लोकगायकाः वर्षागीतानि गायन्ति नृत्यन्त्यपि।
(हिन्दी अनुवाद ― मनुष्य उत्सवप्रिय होते हैं। सामाजिकता के विकास में उत्सव सहायक होते हैं। सुख की वृद्धि के लिए भी वे सहायक होते हैं। उत्सव समाज के स्वभाव को तथा संस्कृति को प्रकट करते हैं। भारत में अनेक उत्सव होते हैं। उनमें रक्षाबन्धन एक प्रमुख उत्सव है। यह अवसर मनुष्यों के मनों को प्रसन्न बनाता है। बार-बार बरसती हुई जल की धाराएँ जीवसृष्टि को पुलकायमान करती हैं। मोर अपने पंखों को फैलाकर नाचते हैं। बालिकाएँ और नई युवतियाँ झूलने के खेल से प्रसन्न होती हैं। लोकगायक वर्षा के गीत गाते हैं और नाचते भी हैं।)
रक्षाबन्धनं सुरक्षायाः बन्धनं भवति। यस्मै रक्षासूत्रं दीयते सः सुरक्षावचनं ददाति तद्वचनं प्राणपणेन पालयति च। वर्तमाने काले भगिनी भ्रातुः मस्तके तिलकं कृत्वा रक्षासूत्र बध्नाति। तस्मै मिष्ठान्नं भोजयति तस्य कृते मङ्गलकामना च करोति। भ्राता अपि तस्याः रक्षायै वचनबद्धः भवति। कतिपयाः जनाः संस्था: च सैनिकेभ्यः रक्षासूत्राणि प्रेषयन्ति। सैनिकाः अपि अहर्निशं प्राणर्पणेन देशरक्षां कुर्वन्ति। स्त्रियःवन्धितानां कृते रक्षासूत्रबन्धनार्थं कारागारं गच्छन्ति। सागरतटप्रदेशे जनाः सागरपूजां अपि कुर्वन्ति।
(हिन्दी अनुवाद ― रक्षाबन्धन सुरक्षा का बन्धन होता है। जिसे राखी (रक्षासूत्र) दी जाती है, वह सुरक्षा का वचन देता है और उस वचन का पालन अपनी हथेली पर प्राण रखकर करता है। मौजूदा समय में बहन भाई के माथे पर तिलक करके राखी (रक्षासूत्र) बाँधती है। उसको मिठाई खिलाती है और उसके लिए कल्याण की कामना करती है। भाई भी उसकी रक्षा के लिए वचनबद्ध होता है। कुछ लोग और संस्थाएँ सैनिकों के लिए राखी भेजते हैं। सैनिक भी दिन-रात अपनी हथेली पर प्राण रख कर देश की रक्षा करते हैं। स्त्रियाँ बन्धन में पड़े लोगों के लिए (बन्दियों के लिए) राखी बाँधने के लिए कारागार (बन्दीगृह) जाती हैं। समुद्र के किनारे के प्रदेश में रहने वाले लोग समुद्र की भी पूजा करते हैं।)
पुराणे एका कथा अस्ति। देवासुरसंग्रामे विजयप्राप्त्यर्थं इन्द्रपत्नी शची इन्द्रस्य रक्षासूत्रबन्धनम् अकरोत्। तदारभ्य रक्षाबन्धनोत्सवस्य आरम्भः इति। पुरा याज्ञिकाः पुरोहिताः यजमानस्य राज्ञः च कल्याणार्थ तेभ्यः रक्षासूत्रार्पण कुर्वन्ति स्म।
(हिन्दी अनुवाद ― पुराणों में एक कथा है। देव और असुरों के संग्राम में विजय प्राप्त करने के लिए इन्द्र की पत्नी शची ने इन्द्र का राखी बन्धन किया। तब से लेकर रक्षाबन्धन का त्यौहार आरम्भ हुआ है। प्राचीन काल में यज्ञ कराने वाले पुरोहित यजमान के तथा राजा के कल्याण के लिए उन्हें राखी अर्पित किया करते थे।)
श्रूयते खलु इतिहासस्य मध्ययुगे साम्राज्ञी कर्मवती हुमायूँ नामाख्यं मुगलशासकं बहुस्नेहेन रक्षासूत्रं प्रेषितवती। सः अपि श्रद्धया तत् स्वीकृतवान्। सः स्नेहेन भ्रातृभगिनीसम्बन्धस्य रक्षां अपि अकरोत्। एवं जातिधर्मनिरपेक्षः अय उत्सवः प्रवर्तते।
(हिन्दी अनुवाद― सुना जाता है कि इतिहास के मध्य युग में महारानी कर्मवती ने हुमायूँ नामक मुगल शासक के लिए बड़े प्रेम से राखी भेजी। उसने भी श्रद्धा से उसे स्वीकार कर लिया। उसने प्रेमपूर्वक भाई और बहन के सम्बन्ध की रक्षा भी की। इस प्रकार यह उत्सव जाति और धर्म से निरपेक्ष है।)
शब्दार्थाः
अति-आह्लादिता (अति + आह्लादिता) अति प्रसन्न।
अग्रजः = बड़ा भाई।
तूष्णीं = चुप होना।
प्रत्यागच्छताम् (प्रति + आ + अगच्छताम्) = लौट आये।
पावनम् (पौ + अन्) = पवित्र ।
रक्षासूत्रं = राखी।
प्रवर्तते = होता है।
आह्लादयति = प्रसन्न करता है ।
दोलनक्रीड़ा = झूला झूलने का खेल।
प्राणपणेन = हथेली पर प्राण रखकर।
स्वबर्हम् = अपने पंख को।
प्रसार्य = फैलाकर ।
भोजयति = खिलाती है/खिलाता है।
गायक: = (गै + अक:) = गायक ।
बध्नाति = बाँधती है।
अभ्यासः
1. एकपदेन उत्तरं लिखत―
(एक शब्द में उत्तर लिखो।)
(क) द्वावपि अग्रजौ कुतः गृहं प्रत्यागच्छताम्?
(दोनों बड़े भाई कहाँ से घर को लौटकर आये थे?)
उत्तरम्― इन्दौरनगरात्।
(ख) के उत्सवप्रियाः भवन्ति ?
(उत्सवप्रिय कौन हुआ करते हैं?)
उत्तरम्― जना:।
(ग) कस्य वृद्ध्यर्थं उत्सवाः सहायकाः?
(किसकी वृद्धि के लिए उत्सव सहायक होते हैं?)
उत्तरम्― सुखस्य।
(घ) श्रावणमासस्य कालः केषां मनांसि आह्लादयति?
(श्रावण महीने का समय किनके मन को प्रसन्न करता है?)
उत्तरम् ― जनानां।
2. एकवाक्येन उत्तरं लिखत―
(एक वाक्य में उत्तर लिखो।)
(क) कै वर्षागीतानि गायन्ति नृत्यन्ति च?
(वर्षा के गीत कौन गाते हैं और नाचते हैं?)
उत्तरम्― लोकगायकाः वर्षागीतानि गायन्ति नृत्यन्ति च।
(लोकगायक वर्षा के गीतों को गाते हैं और नाचते हैं।)
(ख) का रक्षासूत्रं बध्नाति?
(राखी कौन बाँधती है?)
उत्तरम्― भगिनी रक्षासूत्रम् बध्नाति।
(बहन राखी बाँधती है।)
(ग) कर्मवती कं रक्षासूत्रं प्रेषितवती?
(कर्मवती ने किसके लिए राखी भेजी थी?)
उत्तरम् ― कर्मवती हुमायूँ नामाख्यं मुगलशासकं रक्षासूत्रं प्रेषितवती।
(कर्मवती ने हुमायूँ नामक मुगलशासक के लिए राखी भेजी थी।)
(घ) के संस्कृतिं प्रकटी कुर्वन्ति?
(संस्कृति को कौन प्रकट करते हैं?)
उत्तरम्― उत्सवा : संस्कृति प्रकटी कुर्वन्ति।
(उत्सव संस्कृति को प्रकट करते हैं।)
3. रेखांकितशब्दान् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत―
(नीचे लिखे रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न बनाओ।)
(क) मयूराः स्वव प्रसार्य नृत्यन्ति ।
(ख) बालिका नवयुवतयः दोलनक्रीडया प्रसन्नाः भवन्ति।
(ग) सैनिका: अहर्निश: देशरक्षां कुर्वन्ति।
(घ) श्रावणमासस्य पौर्णिमायां रक्षाबन्धनपर्व भवति।
उत्तर― (क) के स्वबर्ह प्रसार्य नृत्यन्ति?
(ख) बालिकाः नवयुवतयः कया प्रसन्नाः भवन्ति?
(ग) सैनिकाः अहर्निशं किम् कुर्वन्ति?
(घ) कस्य मासस्य पौर्णिमायां रक्षाबन्धनपर्व भवति?
4. अर्थानुसारं युग्मनिर्माणं कुरुत―
(अर्थ के अनुसार जोड़ी का निर्माण करो।)
―――― (अ) ―――――――――――― (ब)
(क) ते संस्कृति प्रकटीकुर्वन्ति —―― (1) सागरतटे
(ख) सागरपूजामपि कुर्वन्ति जनाः — (2) रक्षाबन्धनोत्सवः
(ग) जातिधर्मनिरपेक्षः अयं उत्सव — (3) भगिनी
(घ) तस्मै मिष्टान्नं भोजयति ――――— (4) उत्सवा
उत्तरम् ―― (अ) ―――――――――― (ब)
(क) ते संस्कृति प्रकटीकुर्वन्ति —―― (1) उत्सवा
(ख) सागरपूजामपि कुर्वन्ति जनाः — (2) सागरतटे
(ग) जातिधर्मनिरपेक्षः अयं उत्सव — (3) रक्षाबन्धनोत्सवः
(घ) तस्मै मिष्टान्नं भोजयति ――――— (4) भगिनी
5. निम्नलिखितपदानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत―
(निम्नलिखित शब्दों के मूल शब्द, विभक्ति और वचन लिखो।)
क्र. ― पदानि ― मूलशब्दः ― विभक्तिः ― वचनम्
यथा– अग्रजौ ― अग्रज ― प्रथमा/द्वितीया ― द्विवचनम्
(क) पौर्णिमायाम् ― पूर्णिमा ― सप्तमी ―― एकवचन
(ख) स्नेहेन ――― स्नेह ―― तृतीया ――एकवचन
(ग) सुखस्य ――― सुख ―― षष्ठी ―― एकवचन
(घ) सहायकाः ―― सहायक ― प्रथमा ― बहुवचन
6. कोष्ठात् उचितरूपं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत―
(कोष्ठक से उचित रूप चुनकर रिक्त स्थानों को पूरा करो।)
(क) अद्य त्वं बह्राह्लादिता असि। (अस्ति/असि)
(ख) सर्वे तूष्णीं भवन्तु। (भवतु/भवन्तु)
(ग) परश्वः रक्षाबन्धनपर्व भविष्यति। (भविष्यति/भवति)
(घ) वर्षागीतानि गायन्ति गायका:। (गायका:/गायक:)
(ङ) स्ववहं प्रसार्य नृत्यति मयूर:। (मयूरा:/मयूर:)
7. निम्नाङ्कितशब्दान् आवृत्य वाक्यनिर्माणं कुरुत―
(निम्नलिखित शब्दों के आधार पर वाक्य निर्माण करो।)
उत्तर― (क) श्रावणमासे― श्रावणमासे पूर्णिमायाम् रक्षाबन्धनस्य उत्सवः भवति।
(ख) मयूराः ― वर्षाकाले मयूराः स्वबर्हं प्रसार्य नृत्यन्ति।
(ग) सैनिकाः ― सैनिका: देशस्य रक्षार्थम् सर्वस्वम् त्यजन्ति।
(घ) लोकगायकाः ― लोकगायकाः श्रावणमासे गीतानि गायन्ति।
8. पाठात् चित्वा सन्धियुक्तशब्दान् लिखत―
(पाठ से चुनकर सन्धि युक्त शब्दों को लिखो।)
(क) गै+ अक: = गायक।
(ख) नाम + आख्यम् = नामाख्यम्।
(ग) द्वौ + अपि = द्वावपि।
(घ) नृत्यन्ति + अपि = नृत्यन्त्यपि।
9. नायकः, इत्यादि, उभावपि राजाज्ञा, एतेषां शब्दानां सन्धिविच्छेदं कुरुत।
(निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद करो।)
(1) नायकः ― नै + अक:
(2) इत्यादि ― इति + आदि
(3) उभावपि ― उभौ +अपि
(4) राजाज्ञा ― राजा + आज्ञा
योग्यताविस्तारः
(1) पठित्वा ― ज्ञायताम्
चैत्रमासे ― वर्षप्रतिपदा (वर्षारम्भः)
श्रावणमासे ― रक्षाबन्धनोत्सवः
आश्विनमासे ― विजयादशमी
कार्तिकमासे ― दीपावलिः
पौषमासे ― मकरसङ्क्रान्तिः
फाल्गुनमासे ― होलिकोत्सवः
अगस्तमासे ― नवरोज्
(2) 'दीपावलि' विषये पञ्चवाक्यानि लिखत―
('दीपावली' के बारे में पाँच वाक्य लिखिए।)
(अ) भारतवर्षस्य एकः महान् उत्सवः अस्ति।
(आ) दीपावलि इत्युक्ते दीपानाम् आवलिः।
(इ) अयम् उत्सवः कार्तिकमासास्य अमावस्यायां भवति।
(ई) सर्वे जनाः स्वगृहाणि स्वच्छानि कुर्वन्ति , सुधया लिम्पन्ति सुन्दरैः च चित्रैः भूषयन्ति।
(उ) अस्य पर्वण: दीपालिका, दीपोत्सव:, सुखरात्रि:, सुखसुप्तिका, यक्षरात्रि:, कौमुदीमहोत्सव: इत्यादीनि नामानि अपि सन्ति।
(3) वर्षर्तुम् आधृत्य संस्कृते पञ्चवाक्यानि लिखत―
(वर्षा ऋतु पर आधारित पाँच वाक्य संस्कृत में लिखिए।)
(अ) ऋतुषु तृतीयः ऋतुः वर्षा-ऋतुः भवति।
(आ) ग्रीष्मानन्तरं वर्षा-ऋतुः आगच्छति।
(इ) आकाशमण्डलं निरन्तरं मेघैः आच्छन्नं तिष्ठति।
(ई) वर्षा-ऋतौ सर्वेषां महान् आनन्दः भवति।
(उ) जलाशयेषु मण्डूकः रटन्ति। बिलेषु झिल्लिकाः नदन्ति।
सर्वान् रक्षन्तु सर्वदा।
(हर समय सभी की रक्षा करें।)
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
Thank you.
R. F. Tembhre
(Teacher)
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